जनसामान्य और ग्रामीण समाज तक अपनी बात को सबसे सरल, आत्मीय और मनोरंजक रूप में पहुंचाने की संपन्न व्यवस्था
किशोरिका सोसायटी के साथ विभिन्न क्षेत्रों के कुशल और प्रशिक्षित लोक कलाकार जुड़े हुए हैं। ये कलाकार स्थानीय बोली (बुंदेली, मालवी, निमाड़ी, गोंडी, बघेली आदि) में विज्ञान के जटिल सिद्धांतों, अंधविश्वास निवारण और महिला सशक्तीकरण के संदेशों को लोकगीतों और नुक्कड़ संवादों में ढालकर सीधे जनमानस के हृदय तक पहुंचाते हैं।
कठपुतली (Puppetry) भारतीय लोकसंस्कृति का अत्यंत प्रभावी और आत्मीय माध्यम है। संस्था के पास कठपुतली संचालन के कुशल कलाकार हैं, जो विशेष रूप से तैयार की गई स्क्रिप्ट्स के माध्यम से अंधविश्वास उन्मूलन, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, टीकाकरण और बालिका शिक्षा जैसे गंभीर विषयों पर अत्यंत रोचक व मनोरंजक प्रस्तुतियां देते हैं।
संस्था के पास विज्ञान जत्थों, प्रभात फेरियों और नुक्कड़ कार्यक्रमों में संगीत की ऊर्जा भरने हेतु ढोलक, हारमोनियम, मंजीरा, खंजरी, डफली और ताशा जैसे विभिन्न पारंपरिक वाद्य यंत्रों का समृद्ध संग्रह है। इन वाद्य यंत्रों की संगति से वैज्ञानिक जागरूकता के गीतों को सामूहिक रूप से गाया जाता है, जिससे पूरा वातावरण चेतनामय हो जाता है।
किशोरियों में वैज्ञानिक प्रेरणा भरने के उद्देश्य से संस्था के पास भारत एवं विश्व की महान महिला वैज्ञानिकों (जैसे मैडम क्यूरी, जानकी अम्माल, आनंदीबाई जोशी, कल्पना चावला, टेसी थॉमस आदि) के जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों पर आधारित चित्रों, जीवन-वृत्त, मॉडलों और व्याख्यात्मक पोस्टर्स की विशाल प्रदर्शनी सामग्री उपलब्ध है।
यदि आपका विद्यालय, महाविद्यालय अथवा सामाजिक संस्था इस प्रदर्शनी अथवा लोककला विज्ञान सत्र का आयोजन कराना चाहती है, तो हमसे संपर्क करें।